1975 में आई सुपरहिट फिल्म \'जूली\' उनके करियर का अहम पड़ाव साबित हुई. इस फिल्म में उन्होंने मुख्य किरदार की दोस्त का रोल निभाया और उन पर फिल्माया गया गीत \'ये रातें नई पुरानी\' भी काफी लोकप्रिय हुआ. इसके बाद उन्होंने \'सावन को आने दो\', \'अनुरोध\', \'बेटा\', \'हम आपके हैं कौन\', \'राजा\', \'क्या कहना\', \'कभी हां कभी ना\' और \'दिल विल प्यार व्यार\' जैसी कई फिल्मों में दमदार सहायक भूमिकाएं निभाईं.
नाम के कारण जुड़ा जया बच्चन से रिश्ता
जैसा कि सभी जानते हैं जया बच्चन का शादी से पहले नाम जया भादुड़ी थी. वहीं कई बार लोग रीता भादुड़ी की बहन और अमिताभ बच्चन की साली समझ लेते थे. इसी पर नवभारत टाइम्स को 2010 में दिए इंटरव्यू में कहा था, जब मैं आखिरी बार जयपुर आई थी तो किसी ने मुझसे पूछा कि क्या आप जया भादुड़ी की बहन हैं? मैं इसे सुनने के बाद बहुत गुस्सा हो गई थी. इंडस्ट्री में एंट्री किए इतने साल हो गए. लेकिन आज तक लोगों को नहीं पता कि हमारे बीच कोई कनेक्शन नहीं है. लोग अक्सर मुझे जया की बहन समझ लेते हैं. लेकिन जाने दो यह मेरे लिए मायने नहीं रखता.
गुजराती सिनेमा में हीरोइन रहीं रीता भादुड़ी
रीता भादुड़ी की खास बात यह थी कि वह जिस भी किरदार को निभाती थीं, उसमें पूरी तरह ढल जाती थीं. चाहे मां का रोल हो, बहन का या फिर किसी परिवार की समझदार महिला का, वह हर किरदार को इतना सहज बना देती थीं कि दर्शकों को वह बिल्कुल अपने घर की सदस्य जैसी लगती थीं. बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी फिल्मों के अलावा रीता भादुड़ी ने गुजराती सिनेमा में भी शानदार काम किया. 1976 में आई फिल्म \'लाखो फुलानी\' की सफलता के बाद वह करीब आठ साल तक गुजराती फिल्मों की लोकप्रिय हीरोइन रहीं. वहां उन्होंने बतौर लीड एक्ट्रेस कई हिट फिल्में दीं और अपनी अलग पहचान बनाई.
70 फिल्में और 20 से ज्यादा किए शोज
90 के दशक में जब टीवी का दौर शुरू हुआ तो रीता ने छोटे पर्दे पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. \'क्योंकि सास भी कभी बहू थी\', \'साराभाई वर्सेस साराभाई\', \'कुमकुम\', \'अमानत\', \'ससुराल गेंदा फूल\' और \'निमकी मुखिया\' जैसे धारावाहिकों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया. खासतौर पर \'निमकी मुखिया\' में दादी का किरदार उनके आखिरी यादगार रोल्स में शामिल है. रीता भादुड़ी ने अपने करियर में करीब 70 फिल्मों और 20 से ज्यादा टीवी धारावाहिकों में काम किया. फिल्म \'राजा\' में शानदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार के लिए नामांकन भी मिला था. जहां उनका करियर सफल रहा, वहीं निजी जिंदगी में उन्होंने अकेले रहने का फैसला किया. उन्होंने कभी शादी नहीं की. जीवन के अंतिम वर्षों में वह डायबिटीज और किडनी की गंभीर बीमारी से जूझती रहीं. इलाज के लिए उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 17 जुलाई 2018 को 62 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.