दूध
और छुहारे का एक साथ सेवन करना आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों
के अनुसार एक अत्यंत गुणकारी और चमत्कारी उपाय है,
जो हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
डालता है। आयुर्वेद में इस पारंपरिक औषधि को एक शक्तिशाली रसायन अर्थात टॉनिक माना
गया है, जो शरीर की कायापलट करने की क्षमता रखता है। दूध
को प्रकृति ने एक संपूर्ण आहार बनाया है जिसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, कैल्शियम,
विटामिन बी -12
और पौधे की प्रचुर मात्रा शामिल होती है, जो मिश्रण के विकास और शरीर के आंतरिक अंगों को
मजबूत करने का काम करती है। इसके विपरीत छुहारा या सूखा खजूर आयरन, पोटैशियम,
मैग्नीशियम,
कॉपर,
कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज का एक ऐसा खजाना है
जो शरीर को अपवित्र होने से जोड़ता है और मसाले में प्राण देता है। जब आप इन दोनों
तासीर वाली नी को एक साथ मिलाकर समग्र कंज्यूम करते हैं, तो इन दोनों पोषण संबंधी गुण विशेषज्ञों के समूह
में कई गुण अधिक प्रभावशाली हो जाते हैं।
सबसे
पहले और सबसे महत्वपूर्ण लाभ हमारी कंपनी के स्वास्थ्य पर दिखाई देता है। आधुनिक
भाग में भारी दौड़ के कारण जीवन और मताधिकार के कारण कम उम्र में ही जोड़ों में
दर्द, गठिया और हड्डियों के खराब होने की समस्या आम हो
गई है। ऐसे में दूध और छुहारे का यह मिश्रण जोड़ों के घनत्व यानी बोन डेंसिटी को
सुधारता है और जोड़ों की हड्डियों और दांतों को फुलाद जैसा मिश्रण प्रदान करता है।
इसके अलावा, जिन लोगों का शरीर हमेशा थका-थका रहता है, थोड़ी सी मेहनत करने पर सांस फूलने लगती है या
जिसमें क्रोनिक फैटिग सिंड्रोम की शिकायत रहती है,
उनके लिए यह एनर्जी बूस्टर का काम करता है।
छुहारे में मौजूद प्राकृतिक ग्लूकोज पचने में आसान होते हैं और शरीर को तत्काल
ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे सुलाकी संचारित होता है।
उदाहरण
यानी खून की कमी से विद्वान रह रहे लोगों के लिए भी यह किसी अमृत से कम नहीं है।
छुहारे में पाए जाने वाले प्रचुर मात्रा में आयरन लाल रक्त परमाणु (आरबीसी) के
निर्माण को तेज किया जाता है, जिससे
शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर मजबूत होता है और चेहरे पर प्राकृतिक लाली और ग्लो
दिखाई देता है। पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे कब्ज,
एसिडिटी और अपच के मामलों में भी यह कॉम्बिनेशन
काम का असर दिखाता है। छुहारे में मौजूद अल्ट्रा रेस्टॉरेंट की पेरिस्टाल्टिक गति
को सामान्य रूप से रोका जाता है जिससे मल त्याग आसान हो जाता है और सुबह पेट
बिल्कुल साफ रहता है। मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह अत्यंत है; आज के दौर में तनाव, एंग्ज़ाइटी और अवसाद के कारण लोगों की नींद उड़
गई है, ऐसे में सोने से पहले इस टॉनिक को पीने से
तंत्रिका को गहरी शांति मिलती है, मेलाटोनिन
हार्मोन का स्तर बिगड़ जाता है और इंसोमोनिया की बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाती है।
इसे
अपने परिचय में शामिल करने की प्रक्रिया बेहद सरल है। समर हो या समर, दोनों ही मौसमों में इसका सेवन किया जा सकता है, बस समर में छुहारे की मात्रा थोड़ी नियंत्रित
रखी जा सकती है। इसे बनाने के लिए रात को सोने से एक घंटे पहले एक अच्छा ग्लास
क्वालिटी का दूध लें, जिसमें 2
से 3
चिप्स चिप्स का अनुपात गुठ अनुपात पहले ही
निकाला गया हो गया, स्केलेबल एडजस्टमेंट पर से कम 5 से 7
मिनट तक की तरह की मूर्तियां। सिद्धांतने से
छुहारे नर हो जाते हैं और उनके सभी पोषक तत्त्व दूध में डूब जाते हैं। जब दूध
थोड़ा सा गुनगुना या पीने योग्य रह जाए,
तब पहले उन नग्न पड़े संतृप्तों को अच्छी तरह से
चबा-चबाकर देखें और अंत में उस मादक दूध को पी लें। नियमित रूप से इस दिनचर्या को
बदलने से कुछ ही तरह से आपके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) इतनी मजबूत हो
जाएगी कि आपकी त्वचा में कसावट आएगी,
बाल मजबूत होंगे और आप खुद को अंदर से अधिक
ऊर्जावान और युवा महसूस करेंगे।