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मौसम बदलते ही क्यों जकड़ लेती है सर्दी-खांसी? जानें इसका असली कारण

Posted on: 2026-09-04
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मौसम बदलते ही क्यों जकड़ लेती है सर्दी-खांसी? जानें इसका असली कारण

मौसम बदलते ही सर्दी-खांसी की चपेट में आना एक बेहद आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या बन जाती है, जिसके पीछे कई वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और जैविक कारण छिपे होते हैं। जब गर्मी से सर्दी या सर्दी से गर्मी का संक्रमण काल शुरू होता है, तो प्रकृति में होने वाले इन बदलावों का सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। तापमान में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से हवा में नमी और तापमान का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है, जो राइनोवायरस, एडेनोवायरस और फ्लू जैसे खतरनाक वायरसों के पनपने, जीवित रहने और तेजी से फैलने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। ये वायरस हवा में बहुत आसानी से तैरते रहते हैं और सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

 

इन वायरसों के अलावा, मौसम के इस उतार-चढ़ाव से हमारे शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली और रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम पर भी गहरा असर पड़ता है। जब मौसम बार-बार बदलता है, तो हमारे शरीर को खुद को ढालने का पूरा वक्त नहीं मिल पाता, जिससे शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है। इस स्थिति में हमारी इम्युनिटी कुछ समय के लिए कमजोर पड़ जाती है, और शरीर की रक्षा करने वाली श्वेत रक्त aनिकाएं इन बाहरी संक्रमणों का मुकाबला करने में थोड़ी धीमी हो जाती हैं, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से हमारे शरीर पर हमला बोल देते हैं।

 

इसके साथ ही, हमारी श्वसन प्रणाली यानी रेस्पिरेटरी सिस्टम पर भी इस मौसम का बुरा प्रभाव पड़ता है। जब ठंडी, शुष्क या दूषित हवा हमारी सांस की नली से होकर गुजरती है, तो वहां की संवेदनशील अंदरूनी परत सूख जाती है या उसमें सूजन आ जाती है। इस सूजन और सूखापन की वजह से फेफड़ों और नली में बलगम या कफ जमने लगता है, जिसे बाहर निकालने के लिए शरीर लगातार खांसी की प्रतिक्रिया देता है। इस सबके ऊपर, मौसम बदलने के दौरान हवा में धूल के कण, परागकण यानी पोलन ग्रेन्स और प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ जाता है। ये एलर्जी पैदा करने वाले तत्व सांस के जरिए सीधे हमारे फेफड़ों तक पहुंचते हैं, जिससे लगातार छींके आने, गले में खराश और सीने में जकड़न की दिक्कत और ज्यादा गंभीर हो जाती है। इन सभी वजहों से मौसम का बदलते ही लोग आसानी से सर्दी-खांसी और जुकाम का शिकार हो जाते हैं।

 

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