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आपदा प्रबंधन में ‘जीरो कैजुअल्टी’ के नए युग में भारत, अमित शाह बोले- आपदा रोधी गांव और शहर बनाना लक्ष्य

Posted on: 2026-09-11
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आपदा प्रबंधन में ‘जीरो कैजुअल्टी’ के नए युग में भारत, अमित शाह बोले- आपदा रोधी गांव और शहर बनाना लक्ष्य

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश के आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली में आमूल-चूल बदलाव आया है। पहले आपदा प्रबंधन को केवल राहत और पुनर्वास तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब भारत जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली और ‘Zero Casualty’ के लक्ष्य के साथ नए दौर में आगे बढ़ रहा है।

कई आपदाओं में ‘Zero Casualty’ हासिल करना बड़ी उपलब्धि

अमित शाह ने कहा कि देश ने कई आपदाओं का ‘Zero Casualty’ के साथ सफलतापूर्वक सामना किया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अब आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के साथ-साथ उसे रोकने, जोखिम कम करने और समय रहते लोगों को सुरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।

आपदा रोधी गांव और शहर बनाना लक्ष्य

गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य देश में आपदा रोधी गांव और आपदा रोधी शहर तैयार करना है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राथमिकता में रखते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। आपदा प्रबंधन में सरकार के सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी के साथ ‘Whole of Government’ अप्रोच को और मजबूत करना होगा।

पर्यावरण संरक्षण से आपदा रोकथाम पर जोर

अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण में बदलाव के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि आपदाओं की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय पर्यावरण संरक्षण है। पर्यावरण संरक्षण, जोखिम न्यूनीकरण, लचीलापन और व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के कारण भारत धीरे-धीरे दुनिया में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।

NIDM को अनुसंधान और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र बनाने पर जोर

गृह मंत्री ने कहा कि NIDM आज अनुसंधान, नवाचार, नीति समर्थन, प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग का राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को इससे जोड़कर नए क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में हो रहे शोध का अध्ययन कर उसके निष्कर्षों को भारत की स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू किया जाना चाहिए।

NIDM को कृषि भवन से मिला नया स्वरूप

अमित शाह ने कहा कि एक समय NIDM का पूर्ववर्ती रूप राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र कृषि भवन के एक कोने में लगभग निष्क्रिय पड़ा था। वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे गृह मंत्रालय के अधीन लाकर नया जीवन दिया। इसके बाद पीएम मोदी ने संस्थान को मजबूत आधार देने के लिए भूमि आवंटित की और आज NIDM एक सशक्त संस्थान के रूप में देश के सामने है।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ेंगी नई तरह की आपदाएं

गृह मंत्री ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में आपदाओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। विज्ञान के नए प्रयोगों और तकनीकी बदलावों के साथ नई तरह की आपदाएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में NIDM और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

हर विभाग में बनेगा आपदा प्रबंधन सेल

अमित शाह ने सभी हितधारकों को अपने-अपने विभागों में एजेंडे के क्रियान्वयन के लिए एक फोकस्ड सेल बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विभाग प्रमुख हर तीन महीने में कम से कम एक बार इसकी समीक्षा बैठक करें और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें।

हर आपदा के बाद क्षति के कारणों का अध्ययन जरूरी

गृह मंत्री ने कहा कि प्रत्येक आपदा के बाद NDMA और NIDM की संयुक्त टीम बनाई जानी चाहिए, जिसमें NDRF और SDRF के प्रतिनिधि भी शामिल हों। यह टीम आपदा से हुई क्षति के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

आपदा प्रबंधन की स्पष्ट गाइडलाइन तैयार हों

अमित शाह ने NIDM और NDMA को देशभर के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने को कहा। इनमें प्रत्येक प्रकार की आपदा के दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए और किस तरह कार्रवाई करनी चाहिए, इसकी स्पष्ट रूपरेखा हो। उन्होंने कहा कि NIDM प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभाए, जबकि NDRF, SDRF और अन्य संबंधित एजेंसियां इन दिशानिर्देशों को जमीन पर लागू करें।

प्रशिक्षण को व्यावहारिक और गंभीर बनाने पर जोर

गृह मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो इस विषय को लेकर गंभीर हों और आपदा के समय प्रभावी ढंग से काम कर सकें। उन्होंने प्रशिक्षण और गाइडलाइन से आगे बढ़कर ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जो आपदा के सामने मजबूती से खड़े होने में सक्षम हो।

टिड्डी दलों से बचाव की स्थायी तैयारी के निर्देश

अमित शाह ने कृषि विभाग को पाकिस्तान की तरफ से आने वाले टिड्डी दलों के हमलों से बचाव की स्थायी तैयारी पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने विदेशों में अपनाई जा रही बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें भारत की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की जरूरत बताई।

आपदा निधि में बड़ा इजाफा

अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने आपदा निधि के वितरण को वैज्ञानिक प्रक्रिया के साथ संचालित करने का निर्णय लिया है। मोदी सरकार में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) में करीब चार गुना और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। पिछले 11 वर्षों में इस क्षेत्र में करीब ढाई लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

आपदा प्रबंधन व्यवस्था में हुए कई संस्थागत बदलाव

गृह मंत्री ने बताया कि 20 वर्षों के बाद आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन किया गया है। शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की परिकल्पना और स्थापना की गई है तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर डिजिटल आपदा डेटाबेस तैयार करने की शुरुआत हुई है। राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) को वैधानिक दर्जा भी दिया गया है। इसके अलावा 16वें वित्त आयोग ने इस अवधि के लिए दो लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

आपदा प्रबंधन ऐप को शिक्षा संस्थानों तक पहुंचाने का निर्देश

अमित शाह ने आपदा प्रबंधन के लिए विकसित मोबाइल एप्लिकेशन को प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के स्तर तक व्यापक रूप से प्रचारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा संबंधी जागरूकता और तैयारी को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए शिक्षा व्यवस्था का उपयोग किया जाना चाहिए।

पांच लाख गांवों पर प्राथमिकता

गृह मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है, लेकिन देश के करीब पांच लाख गांवों को आपदा रोधी बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया से सीखने के साथ अपने अनुभव भी दुनिया के साथ साझा कर सकता है। उन्होंने NIDM को वैश्विक स्तर पर आदर्श संस्थान के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

साल में एक शीर्ष स्तरीय बैठक अनिवार्य

अमित शाह ने NIDM की कम से कम एक शीर्ष स्तरीय बैठक हर वर्ष अनिवार्य रूप से आयोजित करने का निर्देश दिया, ताकि बैठकें परिणामोन्मुखी हों और लिए गए निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि NIDM के माध्यम से ज्ञान को क्षमता, क्षमता को तैयारी और तैयारी को परिणाम में बदलना होगा, ताकि ‘Zero Casualty’ का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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