Washington: वैज्ञानिकों ने इंसानी कोशिकाओं की सतह पर एक छिपा हुआ शुगर कोड खोज निकाला है, जो बीमारियों का पता लगाने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। ग्लाइकेन एटलसिंग (Glycan Atlasing) नाम की एक एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने कोशिकाओं को ढकने वाली छोटी-छोटी शुगर संरचनाओं का नक्शा तैयार किया और पाया कि ये पैटर्न इस बात के आधार पर बदलते रहते हैं कि कोशिका क्या काम कर रही है।
इम्यून कोशिकाएं सक्रिय होने पर अपनी शुगर की बनावट बदल लेती हैं, और कैंसर वाले ऊतक स्वस्थ ऊतकों की तुलना में सतह पर अलग तरह के संकेत दिखाते हैं। हर इंसानी कोशिका शुगर की एक पतली परत से ढकी होती है, जिसे \'ग्लाइकोकैलिक्स\' (glycocalyx) कहते हैं। यह बाहरी परत कोशिकाओं को अपने आस-पास के माहौल से बातचीत करने में मदद करती है और कोशिका के अंदर क्या चल रहा है, इसके बारे में भी ज़रूरी सुराग दे सकती है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ़ लाइट (MPL) के शोधकर्ताओं ने अब एडवांस्ड हाई-रिज़ॉल्यूशन माइक्रोस्कोपी का इस्तेमाल करके इन शुगर संरचनाओं के विस्तृत नक्शे तैयार किए हैं।
उनके निष्कर्ष, जो \'नेचर नैनोटेक्नोलॉजी\' में प्रकाशित हुए हैं, बताते हैं कि इन शुगर की बनावट में होने वाले बदलाव एक दिन डॉक्टरों को कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। ग्लाइकोकैलिक्स सभी इंसानी कोशिकाओं को एक सुरक्षा कवच की तरह घेरे रहता है। एक ही जगह पर स्थिर रहने के बजाय, ये जटिल शुगर अणु लगातार बदलते और खुद को फिर से व्यवस्थित करते रहते हैं। MPL में प्रो. लियोनहार्ड मोकल के नेतृत्व में फिजिकल ग्लाइकोसाइंसेज शोध समूह के वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन करते हैं कि शुगर की यह परत कैसे काम करती है और यह कोशिका जीव विज्ञान (cell biology) के बारे में क्या जानकारी देती है।