टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी हालिया साइबर सुरक्षा घटना में अब तक किसी महत्वपूर्ण डेटा के नुकसान का कोई प्रमाण नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि प्रारंभिक जांच में किसी संवेदनशील जानकारी के लीक होने के संकेत नहीं मिले हैं और मामले की लगातार निगरानी की जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने नवीनतम डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट के लॉन्च कार्यक्रम में कहा कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ मिलकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “सरकार के अब तक के आकलन के अनुसार किसी महत्वपूर्ण जानकारी का नुकसान नहीं हुआ है।” हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में एप्पल के प्रमुख विनिर्माण साझेदारों में शामिल है। ऐसे में इस साइबर घटना के संभावित प्रभाव को लेकर भी समीक्षा की जा रही है।
इससे पहले सरकार ने बताया था कि इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) इस कथित डेटा उल्लंघन की जांच कर रही है और कंपनी के साथ मिलकर इसके प्रभाव का आकलन कर रही है।
एस. कृष्णन ने कहा कि आज के समय में साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि पूरे संगठन से जुड़ा जोखिम मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साइबर हमलों और सप्लाई चेन से जुड़े बढ़ते खतरों को देखते हुए संस्थानों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि सरकार CERT-In की एडवाइजरी, साइबर स्वच्छता कार्यक्रमों और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से उद्योगों के साथ मिलकर देश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री (CSEAM) के प्रचार के मामले में मेटा को जारी नोटिस पर कंपनी के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जवाब मिलने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।