काठमांडू, 26 जुलाई । नेपाल सरकार बीते वर्षों की भांति वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी लक्ष्य के अनुसार विदेशी अनुदान प्राप्त करने में असफल रही है।
पिछले वित्त वर्ष में 53 अरब 44 करोड़ 69 लाख रुपये विदेशी अनुदान जुटाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन केवल 31 अरब 26 करोड़ 41 लाख रुपये ही प्राप्त हो सके, जो लक्ष्य का 58.5 प्रतिशत है।
हाल के वर्षों में सरकार लक्ष्य के आधे के आसपास ही विदेशी अनुदान जुटा पा रही है। विदेशी सहायता के तहत ऋण की मात्रा लगातार बढ़ रही है लेकिन अनुदान की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। अर्थ मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक बुलेटिन के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में नेपाल औसतन लक्ष्य का केवल 46.12 प्रतिशत विदेशी अनुदान ही प्राप्त कर सका है।
पूर्व अर्थ सचिव डॉ. रामप्रसाद घिमिरे के अनुसार, विदेशी सहायता से जुड़े कार्यक्रमों और परियोजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन न हो पाने के कारण लक्ष्य तथा प्रतिबद्धता के अनुसार अनुदान प्राप्त नहीं हो पाता। उन्होंने कहा, \"अधिकांश अनुदान किसी न किसी कार्यक्रम या प्रोजेक्ट से जुड़े होते हैं। उनका कार्यान्वयन होने पर ही अनुदान की राशि आती है। यदि प्रोजेक्ट्स के काम में तेजी लाई जाए और उन्हें समय पर पूरा किया जाए तो अनुदान की राशि बढ़ सकती है।\"
डॉ. घिमिरे का यह भी कहना है कि हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर ही सरकारों के माध्यम से दिया जाने वाला विदेशी अनुदान कम हो रहा है। इसके अलावा, कई दाता देशों की जनता भी मुफ्त में अनुदान बांटे जाने पर सवाल उठाने लगी है। हालांकि, उनका मानना है कि प्रभावी कूटनीतिक संवाद के जरिए बेहतर परियोजनाओं और कार्यक्रमों के प्रस्ताव बनाकर अनुदान जुटाने की संभावनाएं अब भी बनी हुई हैं।
विदेशी अनुदान प्राप्ति की घोषणा करने लेकिन उसे लाने में विफल रहने की प्रवृत्ति पिछले वित्त वर्ष में भी जारी रही। अर्थ मंत्रालय के ही एक अधिकारी ने बताया कि अनुदान आने की संभावना न होने के बावजूद बजट का आकार बड़ा दिखाने के लिए अनुदान का लक्ष्य बढ़ा-चढ़ाकर रखा जाता है। अधिकारी ने कहा, \"इस सोच के साथ भी बजट में अनुदान का लक्ष्य बड़ा रखा जाता है कि \'इस साल नहीं आया, तो अगले साल सुधार करके बढ़ा लेंगे।\' वहीं कई मामलों में राजनीतिक नेतृत्व केवल बजट का आकार बड़ा दिखाने के लिए अनुदान का बड़ा लक्ष्य तय कर देता है।\"