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ITR अनिवार्यता पर उठे सवाल, TDS रिफंड मामले में केंद्र को हाईकोर्ट का नोटिस

Posted on: 2026-08-07
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ITR अनिवार्यता पर उठे सवाल, TDS रिफंड मामले में केंद्र को हाईकोर्ट का नोटिस

यदि आपकी आय पर टीडीएस (Tax Deducted at Source) कट चुका है, लेकिन आपकी कुल आय इतनी नहीं है कि आपको आयकर देना पड़े, तो भविष्य में बिना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किए भी टीडीएस रिफंड मिलने का रास्ता खुल सकता है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में मांग की गई है कि ऐसे लोगों के लिए ऑटोमेटिक टीडीएस रिफंड सिस्टम लागू किया जाए, जिन्हें टैक्स देनदारी नहीं होने के बावजूद केवल रिफंड प्राप्त करने के लिए आईटीआर दाखिल करना पड़ता है।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने की। अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट का यह कदम उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद लेकर आया है, जिन्हें हर साल टीडीएस कटने के बाद रिफंड पाने के लिए आईटीआर दाखिल करना पड़ता है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को निर्देश दिए जाएं कि वे पात्र करदाताओं के लिए ऑटोमेटिक टीडीएस रिफंड सिस्टम लागू करें। इसके तहत जिन लोगों की टैक्स देनदारी शून्य है और जिनके सभी आवश्यक वित्तीय रिकॉर्ड पहले से सरकार के पास उपलब्ध हैं, उन्हें बिना आईटीआर दाखिल किए सीधे रिफंड जारी किया जा सके।


याचिका में आयकर विभाग के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार लगभग 2.35 करोड़ ऐसे लोगों के नाम टीडीएस क्रेडिट रिकॉर्ड में दर्ज थे जिन्होंने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया। याचिकाकर्ता का दावा है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की हो सकती है जिनकी कोई कर देनदारी नहीं थी, लेकिन वे केवल आईटीआर दाखिल न करने के कारण अपना रिफंड प्राप्त नहीं कर सके। इसके अलावा याचिका में यह भी बताया गया है कि आयकर विधेयक, 2025 की समीक्षा करने वाली संसदीय चयन समिति ने छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए टीडीएस रिफंड हेतु आईटीआर दाखिल करने की अनिवार्यता समाप्त करने की सिफारिश की थी। हालांकि, अंतिम कानून में इस सुझाव को शामिल नहीं किया गया। फिलहाल करदाताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि अभी नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है और केंद्र सरकार का जवाब आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। जब तक सरकार कोई नया प्रावधान लागू नहीं करती या अदालत कोई निर्देश जारी नहीं करती, तब तक जहां आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है, वहां टीडीएस रिफंड प्राप्त करने के लिए मौजूदा नियमों के अनुसार आयकर रिटर्न भरना ही होगा। दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही यह सुनवाई भविष्य में भारत की टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। यदि याचिका के पक्ष में निर्णय आता है या सरकार ऑटोमेटिक टीडीएस रिफंड सिस्टम लागू करती है, तो करोड़ों छोटे करदाताओं को राहत मिलेगी और उन्हें केवल रिफंड पाने के लिए अनावश्यक रूप से आईटीआर दाखिल करने की बाध्यता से मुक्ति मिल सकती है।


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