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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

Posted on: 2026-10-16
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत इस्तीफा स्वीकार किया गया है।

डॉ. मुरुगन ने कल अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि वह जमीनी स्तर पर लौटना चाहते हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होना चाहते हैं और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय समर्पित करना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई। विज्ञप्ति के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार किया गया है। इस घटनाक्रम को तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक रणनीति और संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डॉ. मुरुगन ने अपना इस्तीफा सौंपते समय स्पष्ट किया कि वह अब जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वह भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच रहकर संगठन को मजबूत करने और पार्टी की विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना पूरा समय समर्पित करना चाहते हैं। डॉ. मुरुगन का विशेष ध्यान तमिलनाडु में भाजपा की राजनीतिक स्थिति को बेहतर बनाने पर रहेगा। राज्य में पार्टी का जनाधार बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ना भाजपा के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल है। ऐसे में डॉ. मुरुगन का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देकर संगठनात्मक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा विभिन्न राज्यों में अपनी रणनीति को मजबूत करने पर जोर दे रही है। तमिलनाडु में पार्टी की राजनीतिक पकड़ बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनता के साथ संवाद और संगठन के विस्तार पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा। डॉ. मुरुगन ने भी इसी दिशा में काम करने की इच्छा जताई है। उनका मानना है कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ सीधे जुड़ना और उनकी समस्याओं को समझना बेहद जरूरी है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद से उनके इस्तीफे के बाद अब तमिलनाडु में भाजपा की आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी। हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद पार्टी की ओर से संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा। फिलहाल डॉ. मुरुगन का फैसला इस बात का संकेत देता है कि वह केंद्रीय स्तर की जिम्मेदारी के बजाय राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।

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