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जियो IPO से शेयर बाजार में बड़ा धमाका, तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बनने की तैयारी

Posted on: 2026-10-24
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भारतीय शेयर बाजार में जारी कमजोरी के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी इस डिजिटल और दूरसंचार कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला।

तीन दिनों तक चली बोली प्रक्रिया के दौरान आईपीओ को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। निवेशकों की भागीदारी और आवेदन के आंकड़ों ने भारतीय प्राथमिक बाजार में नया रिकॉर्ड बनाया है। अब निवेशकों की नजर 28 अक्टूबर 2026 पर टिकी है, जब कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना है।

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ ऐसे समय में आया, जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता देखी जा रही थी। इसके बावजूद कंपनी के निर्गम को मिली मजबूत प्रतिक्रिया बताती है

कि बड़े और स्थापित कारोबारी समूहों से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि, आईपीओ में अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने का मतलब यह नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर मुनाफा मिलना निश्चित है।

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ करीब 30,213 करोड़ रुपये का था। 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक चली बोली प्रक्रिया के दौरान निवेशकों ने उपलब्ध शेयरों की तुलना में कई गुना अधिक मांग दर्ज की। अंतिम आंकड़ों के अनुसार, आईपीओ को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इस तरह कंपनी का सार्वजनिक निर्गम भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित आईपीओ में शामिल हो गया।

इस आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) की श्रेणी को लगभग 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी करीब 14 गुना और खुदरा निवेशकों की श्रेणी लगभग 2.72 गुना सब्सक्राइब हुई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने इस निर्गम में काफी मजबूत दिलचस्पी दिखाई।

आवेदन, निवेशकों में उत्साह जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की सबसे बड़ी खासियत निवेशकों की व्यापक भागीदारी रही। रिपोर्टों के अनुसार, इस निर्गम के लिए एक करोड़ से अधिक आवेदन आए।

आवेदन संख्या के लिहाज से इस आईपीओ ने भारतीय बाजार में पहले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। सार्वजनिक निर्गम के तहत निवेशकों की बोलियों का मूल्य लगभग 4.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि एंकर निवेशकों को शामिल करने पर कुल मांग करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये बताई गई।

 कि निवेशकों की ओर से लगाई गई कुल बोलियों की रकम कंपनी को वास्तव में मिलने वाली राशि नहीं है। आईपीओ का आकार और निवेशकों की ओर से शेयरों के लिए लगाई गई बोलियों का मूल्य अलग-अलग आंकड़े हैं।

कंपनी के निर्गम का आकार करीब 30,213 करोड़ रुपये रहा, जबकि कुल मांग इससे कई गुना अधिक थी। लिस्टिंग के साथ 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का मूल्यांकन अब बाजार की नजर 28 अक्टूबर की प्रस्तावित लिस्टिंग पर है। आईपीओ के ऊपरी मूल्य स्तर 1,119 रुपये प्रति शेयर के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का अनुमानित बाजार पूंजीकरण करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठता है। इस मूल्यांकन के आधार पर कंपनी देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो सकती है और शीर्ष तीन कंपनियों में जगह बनाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, वास्तविक रैंकिंग लिस्टिंग के समय शेयर की कीमत और दूसरी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर निर्भर करेगी। अगर कंपनी का शेयर बाजार में मजबूत प्रदर्शन करता है, तो उसकी कारोबारी हैसियत और निवेशकों के बीच उसकी पहचान को नया आयाम मिल सकता है। वहीं, लिस्टिंग के दिन शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव भी संभव है।

आईपीओ में मजबूत मांग को सीधे तौर पर लिस्टिंग पर मिलने वाले लाभ की गारंटी नहीं माना जा सकता। जियो के कारोबार पर निवेशकों का भरोसा जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार दूरसंचार सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाओं और तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में भी फैला हुआ है। कंपनी का मोबाइल कारोबार, ब्रॉडबैंड, क्लाउड सेवाएं, मनोरंजन और उद्यमों के लिए डिजिटल समाधान उसके कारोबारी दायरे का हिस्सा हैं।

इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं को भी कंपनी की भविष्य की वृद्धि से जोड़कर देखा जा रहा है। निवेशकों के लिए कंपनी की आय, मुनाफे, कारोबार की वृद्धि और भविष्य की योजनाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। किसी बड़े ब्रांड या मजबूत कारोबारी समूह से जुड़ाव अपने आप में निवेश की सफलता सुनिश्चित नहीं करता।

कंपनी का मूल्यांकन, वित्तीय प्रदर्शन और बाजार की परिस्थितियां भी शेयर की कीमत को प्रभावित करती हैं। 28 अक्टूबर को बाजार की परीक्षा जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को मिला मजबूत समर्थन अब लिस्टिंग के दिन बाजार की परीक्षा से गुजरेगा। निवेशकों की निगाह इस बात पर रहेगी कि शेयर किस कीमत पर सूचीबद्ध होता है और कारोबार शुरू होने के बाद उसमें कैसी गतिविधि दिखाई देती है। आईपीओ ने आवेदन और सब्सक्रिप्शन के मामले में उल्लेखनीय आंकड़े दर्ज किए हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लिस्टिंग के समय कंपनी अपना अनुमानित मूल्यांकन बनाए रख पाती है या नहीं। मजबूत सब्सक्रिप्शन से निवेशकों का उत्साह जरूर सामने आया है, लेकिन आगे का प्रदर्शन बाजार की मांग, कंपनी के वित्तीय आधार और निवेशकों की वास्तविक खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगा।






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