केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज नई दिल्ली में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल (FSDC) की 30वीं मीटिंग की अध्यक्षता कर रही हैं।
FSDC घरेलू और ग्लोबल मैक्रो-फाइनेंशियल हालात से उभरते ट्रेंड्स पर विचार-विमर्श करता है। काउंसिल फाइनेंशियल सिस्टम की मज़बूती के लिए सही सुरक्षा उपाय अपनाते हुए, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए संभावित रिस्क को कम करने के लिए पहले से कोशिश करने की ज़रूरत को मानती है।
बैठक में मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन और भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भाग ले रहे हैं।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज नई दिल्ली में वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) की 30वीं बैठक की अध्यक्षता कर रही हैं। इस बैठक में देश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने, आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और घरेलू एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े संभावित जोखिमों पर चर्चा की जा रही है। बैठक का उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र के सामने उभरती चुनौतियों की पहचान करना और उनसे निपटने के लिए आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श करना है। वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना इस परिषद की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। FSDC घरेलू और वैश्विक मैक्रो-फाइनेंशियल परिस्थितियों का आकलन करते हुए अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा करती है। इसके तहत बैंकिंग क्षेत्र, बीमा, वित्तीय बाजारों और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाता है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों में बदलाव, महंगाई, निवेश की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जैसे कारक वित्तीय प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में इन जोखिमों की समय रहते पहचान करना और उचित सुरक्षा उपाय अपनाना महत्वपूर्ण माना जाता है। परिषद का उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में किसी बड़े संकट की आशंका को कम करना और देश की आर्थिक व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं मजबूत बनाना है। बैठक में मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन तथा भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के अध्यक्ष भी भाग ले रहे हैं। इन अधिकारियों की भागीदारी से वित्तीय क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका मौद्रिक स्थिरता और बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है, जबकि बीमा नियामक बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान देता है। इसी तरह, आर्थिक सलाहकार और सरकारी मंत्रालयों के प्रतिनिधि व्यापक आर्थिक परिस्थितियों तथा तकनीकी बदलावों से जुड़े विषयों पर दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। FSDC विभिन्न वित्तीय नियामकों और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने का एक प्रमुख मंच है। इसकी बैठकों में वित्तीय व्यवस्था से जुड़े जोखिमों की समीक्षा के साथ-साथ वित्तीय समावेशन और वित्तीय क्षेत्र के विकास जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, बैठक में लिए गए किसी विशिष्ट निर्णय या प्रस्ताव की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही उसके प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। कुल मिलाकर, परिषद की 30वीं बैठक देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, संभावित आर्थिक जोखिमों से निपटने और वित्तीय प्रणाली की मजबूती सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है