IMG-LOGO

फ्रांस में स्कूलों से सड़कों तक क्यों भड़का गुस्सा? महंगाई, बेरोजगारी और येलो वेस्ट आंदोलन से क्या है कनेक्शन

Posted on: 2026-10-25
IMG
फ्रांस में स्कूलों से सड़कों तक क्यों भड़का गुस्सा? महंगाई, बेरोजगारी और येलो वेस्ट आंदोलन से क्या है कनेक्शन

फ्रांस में सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की तैनाती और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के पीछे आर्थिक दबाव, सामाजिक असंतोष और सरकार की नीतियों से जुड़ी कई वजहें चर्चा में रहती हैं। महंगाई, बेरोजगारी, जीवनयापन की बढ़ती लागत और भविष्य को लेकर युवाओं की चिंता इस असंतोष को समझने के अहम पहलू हैं। हालांकि, फ्रांस में हर विरोध प्रदर्शन का कारण एक जैसा नहीं होता। स्कूलों में छात्रों का प्रदर्शन शिक्षा, अवसरों और सरकारी फैसलों से जुड़ा हो सकता है, जबकि सड़कों पर होने वाले व्यापक आंदोलन में वेतन, पेंशन, ईंधन की कीमतें और जीवनयापन का खर्च प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। इन मुद्दों को समझने के लिए 2018 में शुरू हुए येलो वेस्ट यानी ‘गिले जॉन’ आंदोलन के इतिहास पर नजर डालना जरूरी है।

येलो वेस्ट आंदोलन की शुरुआत 2018 में ईंधन पर कर बढ़ाने के विरोध से हुई थी। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों के लिए, जिन्हें काम पर जाने के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल करना पड़ता था, ईंधन की बढ़ती कीमतें घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बन गई थीं। धीरे-धीरे यह आंदोलन महंगाई, आर्थिक असमानता, कर व्यवस्था और सरकार की प्राथमिकताओं के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया। इमैनुएल मैक्रों की आर्थिक नीतियों को लेकर असंतोष भी इस आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बना। अक्टूबर 2026 में स्कूलों से शुरू हुए प्रदर्शनों में येलो वेस्ट समर्थकों, श्रमिक संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने से पुराने मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं।

वर्तमान विरोध की तात्कालिक वजह शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं हैं। सितंबर 2026 में पेरिस के आसपास के इलाकों में छात्रों और शिक्षकों ने शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं, खराब स्कूल भवनों और पर्याप्त संसाधन न होने के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। बाद में विश्वविद्यालयों के छात्रों, अभिभावकों और श्रमिक संगठनों ने भी इसमें हिस्सा लिया। विरोध का दायरा बढ़ने के साथ महंगाई, ईंधन की कीमतों, वेतन, पेंशन और सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च जैसे मुद्दे भी जुड़ गए। 17 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जबकि 24 अक्टूबर को भी कई शहरों में विरोध जारी रहा

Tags: