गरज-चमक के साथ बारिश का मौसम आते ही आसमान में बिजली कड़कने का डर लगने लगता है। चमकती रोशनी और तेज गड़गड़ाहट देखकर लोगों के मन में सवाल उठता है कि वास्तव में बिजली क्यों चमकती है। यह वायुमंडल में होने वाली एक शक्तिशाली विद्युत घटना है, जो बादलों के बीच, बादल और जमीन के बीच या कभी-कभी हवा में भी होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बिजली एक बड़ा विद्युत डिस्चार्ज है जो विपरीत आवेशों के बीच संतुलन बनाने के लिए होता है। बिजली वायुमंडल में होने वाला एक शक्तिशाली विद्युत डिस्चार्ज है। यह प्रक्रिया तूफान के बादलों में शुरू होती है। गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है। इस टकराहट से बादल के निचले हिस्से में नेगेटिव चार्ज (ऋणात्मक आवेश) जमा होता है, जबकि ऊपरी हिस्से में पॉजिटिव चार्ज (धनात्मक आवेश) बनता है। जब ये विपरीत आवेश काफी ज्यादा हो जाते हैं, तो हवा की इंसुलेटिंग क्षमता टूट जाती है। नतीजा होता है एक तेज विद्युत डिस्चार्ज – यानी बिजली चमकना।
हम जो तेज और चमकीली रोशनी देखते हैं, उसे \'रिटर्न स्ट्रोक\' कहते हैं। यह बिजली चमकने की पूरी प्रक्रिया के अंतिम चरण में होता है। जब नीचे की ओर बढ़ने वाला चार्ज पाथ यानी स्टेप लीडर जमीन या विपरीत चार्ज से जुड़ जाता है, तो नेगेटिव चार्ज तेजी से वापस ऊपर की ओर बहने लगता है। इसी को रिटर्न स्ट्रोक कहते हैं। इसका तापमान 30 हजार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो सूर्य की सतह से भी ज्यादा गर्म है। इतनी गर्मी से आस-पास की हवा अचानक फैल जाती है, जिससे शॉक वेव पैदा होती है और हम गड़गड़ाहट (थंडर) की आवाज सुनते हैं। रोशनी की गति ध्वनि से बहुत तेज होती है, इसलिए पहले बिजली चमक दिखाई देती है और थोड़ी देर बाद गरज सुनाई देती है।
वायुमंडलीय बिजली में कई प्रकार की घटनाएं शामिल हैं जैसे बिजली चमकना, आयनीकरण और अन्य विद्युत प्रक्रियाएं। बिजली के प्रभाव भी व्यापक हैं। यह वायुमंडल में ओजोन और नाइट्रस ऑक्साइड बनाने में मदद करती है, लेकिन जंगलों में आग लगाने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और इंसानों के लिए खतरा पैदा करने के लिए भी जिम्मेदार है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के सैटेलाइट्स और सेंसर्स के अनुसार, पूरी दुनिया में प्रति सेकंड औसतन 35 से 55 बार बिजली चमकती है। उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों में यह संख्या बढ़ सकती है। नासा जमीन, हवा और अंतरिक्ष आधारित उपकरणों से बिजली का अध्ययन करती है। इनमें नॉर्थ अलबामा लाइटनिंग मैपिंग ऐरे, लाइटनिंग इंस्ट्रूमेंट पैकेज और गोस-16 सैटेलाइट जैसे सिस्टम शामिल हैं। ये डेटा तूफानों की भविष्यवाणी, सुरक्षा और ‘क्षणिक दीप्तिमान घटनाओं’ जैसे ऊपरी वायुमंडल में दिखने वाले रंगीन जेट को समझने में मदद करते हैं।
जानकारी के अनुसार, बिजली से हर साल दुनिया भर में लगभग 24 हजार लोगों की मौत और 2 लाख से ज्यादा लोग घायल होते हैं। बिजली पर रिसर्च का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना, तूफानों की तीव्रता समझना और हवाई जहाजों व स्पेस मिशनों को सुरक्षित बनाना है। साल 1969 में अपोलो 12 मिशन के दौरान बिजली गिरने से अंतरिक्ष यान के उपकरण क्षणिक रूप से बंद हो गए थे, लेकिन यात्रियों ने स्थिति संभाल ली था। नासा के साथ ही अन्य स्पेस एजेंसीज लगातार इस पर काम कर रही हैं। पिछले दशकों में बिजली अध्ययन में काफी प्रगति हुई है। ऐसे में वैज्ञानिक बादलों के अंदर होने वाली बिजली (जो कुल गतिविधि का 75% है) को भी बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं। वहीं, नासा का डेटा दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध है, जिससे वायुमंडलीय विज्ञान में नई खोजें हो रही हैं।