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डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे टूटा, ये है गिरावट की बड़ी वजह, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर?

Posted on: 2026-03-02
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डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे टूटा, ये है गिरावट की बड़ी वजह, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर?

भारतीय रुपये के गिरने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil Price) की बढ़ती कीमतें हैं. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ता है. 

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और इजरायल- ईरान युद्ध (Iran-Israel war) ने न केवल शेयर बाजार को हिलाया है, बल्कि इसका सीधा असर अब भारतीय रुपये पर भी पड़ा है.

सोमवार, 2 मार्च को सुबह डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट देखी गई, जिससे आने वाले समय में विदेशों से सामान मंगाना और भी महंगा हो सकता है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से पैसा निकालना रुपये के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है.

शुरुआती कारोबार में 21 पैसे टूटा रुपया

सोमवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 91.23 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही 21 पैसे (0.22%) गिरकर 91.29 के स्तर पर पहुंच गया. पिछले शुक्रवार को रुपया 91.08 पर बंद हुआ था. 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया भर में मची अफरा-तफरी और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर भारी दबाव बना दिया है.

कच्चे तेल की आग ने बढ़ाई मुश्किल

भारतीय रुपये के गिरने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil Price) की बढ़ती कीमतें हैं. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स आज  कारोबार में 3.91% बढ़कर 76.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.

भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ता है. 

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के मिसाइल और सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है.

विदेशी निवेशकों ने हाथ खींचे

शेयर बाजार में आई गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा बड़ी मात्रा में पैसा निकालने से भी रुपये को झटका लगा है. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से ₹7,536.36 करोड़ के शेयर बेचे थे. इसके अलावा, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) भी 20 फरवरी को समाप्त हफ्ते में 2.119 अरब डॉलर गिरकर 723.608 अरब डॉलर रह गया है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?

जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो विदेशों से आयात होने वाली चीजें जैसे कच्चा तेल, खाने का तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाते हैं.

इससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है. हालांकि, सरकार ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर (GDP) 7.6% रहने का अनुमान जताया है, जो एक पॉजिटिव संकेत है, लेकिन फिलहाल मिडिल ईस्ट टेंशन ने बाजार में भूचाल ला दिया है.



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